थनैला रोग से बचाव और दूध की शुद्धता का भरोसेमंद साथी
मास्टा हेल्प पाउडर एक प्रभावी और किफायती फॉर्मूला है जिसे पशुओं में थनैला (Mastitis) की शुरुआती अवस्था को रोकने और थनों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए तैयार किया गया है। यह दूध के रंग और बनावट में होने वाले बदलावों को ठीक कर थनों की कार्यक्षमता बढ़ाता है।
शुरुआती थनैला में असरदार: दूध में आने वाले हल्के छिछड़े या खारेपन को तुरंत नियंत्रित करता है।
दूध का पी.एच. (pH) बैलेंस: यह दूध के असामान्य पी.एच. स्तर को संतुलित करता है, जिससे दूध का फटना बंद होता है।
लेवटी की सुरक्षा: थनों और लेवटी (Udder) की सामान्य सूजन को कम कर उन्हें कोमल और स्वस्थ बनाए रखता है।
दूध की सफेदी और शुद्धता: दूध के प्राकृतिक रंग और गुणवत्ता को बहाल करने में मदद करता है।
पोषक तत्वों से भरपूर: इसमें मौजूद विटामिन्स और मिनरल्स थनों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाते हैं।
मास्टा हेल्प पाउडर (Masta Help Powder) एक विशेष प्रिवेंटिव और क्यूरेटिव (बचाव और उपचार) फॉर्मूला है। डेयरी उद्योग में थनैला (Mastitis) एक ऐसी समस्या है जो देखते ही देखते पशु का दूध सुखा देती है। मास्टा हेल्प पाउडर को उन स्थितियों के लिए तैयार किया गया है जहाँ थनैला की शुरुआत हो रही हो या दूध की गुणवत्ता बिगड़ रही हो। यह पाउडर दूध के रासायनिक संतुलन को सुधारता है और थनों को फिर से स्वस्थ बनाता है।
pH लेवल का प्राकृतिक संतुलन: थनैला होने पर दूध क्षारीय (Alkaline) हो जाता है। मास्टा हेल्प दूध के pH को फिर से सामान्य (6.4 – 6.6) पर लाता है, जिससे दूध का फटना बंद हो जाता है।
थनों की हल्की सूजन में राहत: यह लेवटी (Udder) के भारीपन और शुरुआती सूजन को कम कर पशु को आराम पहुँचाता है।
दूध की बनावट और रंग में सुधार: दूध के पानी जैसा पतला होने या हल्का पीलापन आने की समस्या को दूर कर उसे गाढ़ा और शुद्ध सफेद बनाता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity): इसमें मौजूद तत्व थनों के अंदरूनी छिद्रों (Teat Canal) को मजबूती देते हैं, जिससे बाहरी बैक्टीरिया अंदर नहीं घुस पाते।
किफायती और असरदार: यह कम खर्च में थनैला को गंभीर अवस्था (Chronic Stage) में जाने से पहले ही रोक लेता है।
सही खुराक (Dosage): * हल्के लक्षणों में: 50 ग्राम का एक पैकेट प्रतिदिन (लगातार 3 दिनों तक)।
ज्यादा समस्या होने पर: 50 ग्राम सुबह और 50 ग्राम शाम (लगातार 4-5 दिनों तक)।
देने का तरीका: * दाने या दलिया के साथ: इसे पशु के नियमित दाने, चूरी या भीगे हुए दलिया में अच्छी तरह मिलाकर खिलाएं।
गुड़ के साथ: यदि पशु पाउडर नहीं खा रहा है, तो इसे थोड़े से गुड़ में मिलाकर पेड़ा बनाकर खिला दें।
उपयोग का समय: * दूध निकालने के तुरंत बाद या चारा खिलाते समय इसे देना सबसे अच्छा रहता है।
विशेष सलाह: जैसे ही दूध में पहला बदलाव दिखे (जैसे बर्तन की तली में दाने दिखना), तुरंत इसका उपयोग शुरू कर देना चाहिए।
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